Namskar,,,,,
मुझे तरस आता है उन अर्धपके ज्ञानियो के मानसिक दिवालियेपन का,जो धर्मग्रंथो (भागवतगीता) और संविधान की तुलना कर रहे है।
धर्मग्रंथ वो है जो जीवन पद्धति सिखाते है और संविधान राष्ट्रानिर्मिति...दोनो की तुलना करना याने जल और प्राणवायु की तुलना करना है। जिस तरह दोनो की तुलना होना असंभव है उसी तरह गीता, कुरान, बाइबल, गुरुग्रंथ साहिब जैसे जीवन मार्ग बताने वाले ग्रंथो का देश के आत्मा संविधान के साथ तुलना मूर्ख व्यवहार है।
और मज़े की बात तो ये है मित्रो के टिप्पणी करने वालो ने दोनों ही नही पढ़े है..बस थोड़ा मसाला चाहिए अपनी राजनीति चमकाने और कुछ लोगों के धार्मिक भावनाओं को दुखाने का।
जिस तरह धर्मग्रन्थ अच्छा इंसान बनना सिखाती है उसी तरह संविधान सिखाता है, एक अच्छा नागरिक बनना ।
और एक अच्छा इन्सान हि अच्छा नागरिक और अच्छा नागरिक ही अच्छा इंसान हो सकता है ये हमकब समजेंगे।
एक समझदार इंसान और सूजान नागरिक होने के नाते हम सभी धर्मग्रंथो की इज्जत करते है...क्योकि यही सर्वधर्म समभाव कहलाता है बस बनावटी secularism नही है।
भगवान उन सभी टिका टिप्पणियों करने वालो को पहले सद्बुद्धि दे और फिर उनिको बड़े अधिकारी बनाये क्योकि अब तक ऐसी मूर्ख टिप्पणी करनेवालो में तो मुझे अब तक कोई बड़ा अधिकारी वगैरे दिखाई नही दिया है..
😀
धर्मग्रंथ वो है जो जीवन पद्धति सिखाते है और संविधान राष्ट्रानिर्मिति...दोनो की तुलना करना याने जल और प्राणवायु की तुलना करना है। जिस तरह दोनो की तुलना होना असंभव है उसी तरह गीता, कुरान, बाइबल, गुरुग्रंथ साहिब जैसे जीवन मार्ग बताने वाले ग्रंथो का देश के आत्मा संविधान के साथ तुलना मूर्ख व्यवहार है।
और मज़े की बात तो ये है मित्रो के टिप्पणी करने वालो ने दोनों ही नही पढ़े है..बस थोड़ा मसाला चाहिए अपनी राजनीति चमकाने और कुछ लोगों के धार्मिक भावनाओं को दुखाने का।
जिस तरह धर्मग्रन्थ अच्छा इंसान बनना सिखाती है उसी तरह संविधान सिखाता है, एक अच्छा नागरिक बनना ।
और एक अच्छा इन्सान हि अच्छा नागरिक और अच्छा नागरिक ही अच्छा इंसान हो सकता है ये हमकब समजेंगे।
एक समझदार इंसान और सूजान नागरिक होने के नाते हम सभी धर्मग्रंथो की इज्जत करते है...क्योकि यही सर्वधर्म समभाव कहलाता है बस बनावटी secularism नही है।
भगवान उन सभी टिका टिप्पणियों करने वालो को पहले सद्बुद्धि दे और फिर उनिको बड़े अधिकारी बनाये क्योकि अब तक ऐसी मूर्ख टिप्पणी करनेवालो में तो मुझे अब तक कोई बड़ा अधिकारी वगैरे दिखाई नही दिया है..
जय हिंद और वन्दे मातरम- निखिलसिंह बनाफर.
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